उज्जैन: न्याय के प्रतीक सम्राट विक्रमादित्य की नगरी में स्थित विश्वविद्यालय की साख पर उस समय सवालिया निशान लग गया, जब बीकॉम छठे सेमेस्टर की परीक्षा में एक 'मुन्नाभाई' कांड का खुलासा हुआ। परीक्षा कक्ष में सघन चेकिंग के दौरान एक छात्रा की पहचान को लेकर उपजे संदेह ने पूरी व्यवस्था की कलई खोलकर रख दी। जब एडमिट कार्ड पर अंकित तस्वीर और परीक्षा दे रही युवती के चेहरे का मिलान किया गया, तो हकीकत सामने आते ही अधिकारियों के होश उड़ गए। वागदेवी भवन स्थित कॉमर्स संकाय में हुई इस घटना ने साफ कर दिया कि शिक्षा के मंदिर में सेंधमारी करने वाले गिरोह अब भी सक्रिय हैं।

पहचान की चोरी और फर्जीवाड़े का खुलासा

वागदेवी भवन में चल रही परीक्षा के दौरान ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों को एक छात्रा की गतिविधियों पर कुछ संदेह हुआ। नियमानुसार जब एडमिट कार्ड की गहनता से जांच की गई, तो तस्वीर और छात्रा के वास्तविक चेहरे में स्पष्ट भिन्नता पाई गई। सख्ती से पूछताछ करने पर पकड़ी गई युवती ने कबूल किया कि वह असली अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देने पहुंची थी। यह मामला केवल एक छात्रा के बदले दूसरी युवती के बैठने भर का नहीं है, बल्कि विश्वविद्यालय की प्रवेश प्रक्रिया और सुरक्षा जांच में लगी बड़ी सेंध का जीवंत उदाहरण है। इस खुलासे के बाद परीक्षा केंद्र पर हड़कंप मच गया और तुरंत पुलिस को सूचित किया गया।

सॉल्वर गिरोह की आहट और प्रशासनिक सुस्ती

इस घटना के सामने आते ही विश्वविद्यालय परिसर में सक्रिय छात्र संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। एनएसयूआई के विश्वविद्यालय अध्यक्ष तरुण परिहार ने प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए इसे गंभीर सुरक्षा चूक करार दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि जहाँ छोटी-छोटी नकल सामग्री पर कड़ा पहरा रहता है, वहाँ एक फर्जी अभ्यर्थी अंदर कैसे दाखिल हो गई? प्रारंभिक जांच में यह आशंका भी जताई जा रही है कि उज्जैन में कोई पेशेवर 'सॉल्वर गिरोह' सक्रिय हो सकता है, जो मोटी रकम लेकर डमी उम्मीदवारों के जरिए परीक्षाएं पास कराता है। छात्र नेताओं ने मांग की है कि इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच हो ताकि शिक्षा माफियाओं के असली चेहरे बेनकाब हो सकें।

सख्त कार्रवाई और कानूनी जांच के घेरे में 'सिस्टम'

विश्वविद्यालय के कुलपति अर्पण भारद्वाज ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कड़े कदम उठाने का आश्वासन दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि परीक्षा जैसे संवेदनशील कार्य में कोताही बरतने वाले शिक्षकों और ड्यूटी से नदारद रहने वाले स्टाफ के खिलाफ भी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। उधर, पुलिस प्रशासन ने भी इस मामले को अपने हाथ में ले लिया है। माधवनगर थाने में प्रकरण दर्ज कर फर्जी अभ्यर्थी और असली छात्रा के संपर्कों की तलाश की जा रही है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने बताया कि पुलिस मोबाइल रिकॉर्ड्स और पहचान पत्रों की बारीकी से जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस खेल में और कितने सफेदपोश शामिल हैं।