शुबमन गिल के बाहर होने से भारत के एडिलेड टेस्ट की रणनीति पर असर
भारतीय टीम के टॉप ऑर्डर बल्लेबाज शुभमन गिल अंगूठे की चोट से उबर नहीं पाए हैं और 30 नवंबर से कैनबरा में शुरू होने वाले प्रधानमंत्री एकादश के खिलाफ दो दिवसीय पिंक बॉल वॉर्म-अप मैच से बाहर हो गए हैं। यह चोट गिल को पर्थ में प्रैक्टिस मैच के दौरान लगी थी। हालांकि, 6 दिसंबर से एडिलेड में शुरू होने वाले पिंक बॉल टेस्ट में खेलने को लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
Shubman Gill ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दूसरे टेस्ट से बाहर?
दरअसल, बीसीसीआई के सूत्रों के अनुसार कि जब तक गिल पूरी तरह से ठीक नहीं हो जाते, तब तक वह बैटिंग नहीं करेंगे। उनका खेलना एडिलेड टेस्ट से ठीक पहले तय किया जाएगा। वह वीकेंड पर अभ्यास मैच में नहीं खेलेंगे और दूसरे टेस्ट में भी उनका खेलना संदिग्ध है। देखते हैं कि उनकी चोट कितनी ठीक हुई है, उनकी उंगली कैसी महसूस होती है। चोट ठीक होने के बाद भी उन्हें टेस्ट मैच खेलने से पहले कुछ बेहतरीन अभ्यास की जरूरत होगी।
हाल ही में, मुंबई और भारतीय टीम के पूर्व चयनकर्ता जतिन परांजपे ने कहा था कि चोट के कारण गिल दो से तीन टेस्ट मैच मिस कर सकते हैं।
गिल की गैरमौजूदगी में पर्थ टेस्ट में किसने खेला?
गिल की गैरमौजूदगी में पर्थ टेस्ट में देवदत्त पडिक्कल को नंबर 3 पर मौका दिया गया था। पहले पारी में वह बिना कोई रन बनाए 23 गेंदों पर आउट हो गए। हालांकि, दूसरी पारी में उन्होंने 71 गेंदों पर 25 रन बनाए और केएल राहुल के साथ 74 रनों की साझेदारी की। दोनों बार वह जोश हेजलवुड का शिकार बने। ऐसे में दूसरे टेस्ट में देवदत्त की फॉर्म ने टीम इंडिया की चिंता बढ़ा दी।
अगर गिल नहीं खेलते तो नंबर 3 पर कौन बल्लेबाजी करेगा?
अगर शुभमन गिल समय पर फिट नहीं होते हैं, तो केएल राहुल नंबर 3 पर बल्लेबाजी कर सकते हैं। राहुल ने पर्थ टेस्ट में 103 रन बनाए थे, जिसमें दूसरी पारी में एक शानदार अर्धशतक शामिल है। राहुल के ओपनिंग की संभावना कम है क्योंकि रोहित शर्मा टीम में वापस आ गए हैं। रोहित पर्थ टेस्ट से बाहर थे क्योंकि वह निजी कारण के चलते छुट्टी पर थे।
हालांकि, अगर राहुल और यशस्वी जायसवाल की ओपनिंग जोड़ी को फिर से मौका दिया गया तो यह एक बड़ा फैसला होगा, क्योंकि दोनों ने पर्थ में रिकॉर्ड साझेदारी की थी।
अभी स्थिति वॉर्म-अप मैच के बाद और साफ हो जाएगी। रोहित को भी कैनबरा में कुछ अभ्यास का मौका मिलने की उम्मीद है ताकि वह ऑस्ट्रेलियाई परिस्थितियों में खुद को ढाल सकें।

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