इन दिनों बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से राजनीतिक पारा चढ़ा हुआ है। आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है।  इंदौर में अपर कलेक्टॅर के पद से सेवानिवृत्त हुए डा. रजनीश श्रीवास्तव ने विधानसभा, लोकसभा के चुनाव के साथ मतदाता सूची को अद्यतन करने और चुनावी प्रक्रिया में सक्रियता से अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन किया है। डा. श्रीवास्तव ने आलेख .. मतदाता सूची का भूत में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर आधारित महत्वपूर्ण जानकारी दी है। उम्मीद है इस आलेख से कई भ्रांतियां दूर होंगी।   

आलेख... 

मतदाता सूची का भूत

  • डा. रजनीश श्रीवास्तव

     अभी विभिन्न समाचार पत्रों, टीवी चैनलों और व्हाट्सएप ग्रुपों में मतदाता सूची तैयार करने में की जा रही अनियमितताओं के बारे में जोर-शोर से बहस व चर्चा चल रही है और सभी विपक्षी दल सत्ता दल के साथ भारत निर्वाचन आयोग के ऊपर यह आरोप लगा रहे हैं कि उनके द्वारा त्रुटिपूर्ण मतदाता सूची तैयार कराई जा रही है और इस त्रुटिपूर्ण मतदाता सूची के आधार पर होने वाले चुनाव के परिणाम विपक्षी दलों के विपरीत जाएंगे। 

        इन आरोपों के बारे में गंभीरता से विचार करते हुए मतदाता सूची  बनाने की प्रक्रिया और इस प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता को समझना आवश्यक है।

     मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए मुख्य रूप से व्यक्ति भारत का नागरिक जिसकी आयु 18 वर्ष हो और उसका मतदान केंद्र के क्षेत्र में निवास करना आवश्यक है अर्थात वह निवास स्थान जहाँ पर मतदाता प्रतिदिन रात्रि विश्राम करता है।

    पूरे भारतवर्ष में वर्तमान में लगभग कुल 10,52,664 मतदान केंद्र हैं और इतने ही मतदान केंद्रों पर 10,52,664 बीएलओ द्वारा मतदाता सूची को अद्यतन करने के लिए कार्य किया जाता है। इसमें 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले नए मतदाताओं का नाम जोड़ने, मृत मतदाताओं का नाम काटने, अनुपस्थित मतदाता और अन्यत्र स्थानांतरित हो गए मतदाताओं का नाम हटाने का आवेदन पत्र प्राप्त होने पर तथा स्थानीय स्तर पर जांच कर बीएलओ की अनुशंसा पर रजिस्ट्रीकरण अधिकारी निर्णय लेकर नाम जोड़ने, काटने या अन्यत्र स्थानांतरित करने के संबंध में आदेश पारित करते हैं और उसके उपरांत मतदाता सूची को अद्यतन किया जाता है।

      प्रत्येक विधानसभा में जितने भी मतदान केंद्र होते हैं, उन सभी मतदान केन्द्रों की मतदाता सूची को तैयार और अद्यतन करने का कार्य प्रत्येक मतदान केंद्र के लिए एक बूथ लेवल अधिकारी जिसे संक्षेप में बीएलओ कहते हैं, के ऊपर इस कार्य को निष्पक्ष रूप से करने की जिम्मेदारी रहती है।

     सामान्यतः एक मतदान केंद्र में 1000 से 1200 के लगभग अधिकतम मतदाता हो सकते हैं और उनके नाम अद्यतन रखने की जिम्मेदारी एक बीएलओ पर होती है।

       2013 के पूर्व मतदाता सूची तैयार करने की जिम्मेदारी बीएलओ पर ही रहती थी और वह बीएलओ मतदान केंद्र से संबंधित क्षेत्र में भ्रमण कर सभी मतदाताओं का भौतिक सत्यापन कर उनके नाम मतदाता सूची में अद्यतन करता था।

 

      वर्ष 2013 के मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के पूर्व भारत निर्वाचन आयोग द्वारा यह आदेश दिया गया कि हर बीएलओ के साथ बीएलए अर्थात बूथ लेवल एजेंट सभी राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के द्वारा नियुक्त किए जाएंगे और यह बीएलओ के साथ मिलकर मतदाता सूची के अद्यतन करने का कार्य की निष्पक्षता व पारदर्शिता देखेंगे, अर्थात एक बीएलए एवं बीएलओ को अधिकतम 1000 से 1200 मतदाताओं के नाम सही-सही मतदाता सूची में दर्ज करने की जिम्मेदारी रहेगी। अर्थात 10,52,664 बीएलए की नियुक्ति प्रत्येक राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त राजनैतिक दल को करना चाहिए।

       वर्तमान में छह राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल हैं। जिनके नाम भारतीय जनता पार्टी, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, सीपीआई (M), नेशनल पीपुल्स पार्टी और आम आदमी पार्टी हैं। जिनके बूथ लेवल एजेंट की नियुक्ति सम्बंधित राजनैतिक दल द्वारा किया जाता है और यदि उक्त दल बीएलए नियुक्त कर दें तो कुल बीएलए की संख्या 63,15,984 हो जाएगी। यह एजेंट अपने मतदान केंद्र के बीएलओ के साथ रहकर मतदाता सूची तैयार करने में मदद करेंगे ताकि त्रुटि रहित मतदाता सूची तैयार हो सके। ऐसी स्थिति में कोई भी राजनीतिक दल इस प्रकार का आक्षेप नहीं लगा सकता कि मतदाता सूची त्रुटि पूर्ण तरीके से तैयार हो रही है। क्योंकि मतदाता सूची तैयार करने की जिम्मेदारी बीएलओ को दी गई है मगर पूर्ण पारदर्शिता के लिए बीएलओ के साथ सभी राजनीतिक दलों को अपना एक बूथ लेवल एजेंट बीएलए नियुक्त करने के लिए अनुमति दी गई है। ऐसी स्थिति में सभी राजनीतिक दलों को अपना एजेन्ट बीएलओ के साथ लगाना चाहिए और कहीं भी अगर कोई त्रुटि बीएलओ द्वारा की जा रही है तो उसकी लिखित में आपत्ति प्रमाण सहित रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करनी चाहिए अर्थात यदि बीएलओ द्वारा जीवित व्यक्ति को मृत बताकर उसका नाम काटा जा रहा है या किसी अपात्र व्यक्ति का नाम जोड़ दिया गया है तो उसके प्रमाण बीएलए को रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करने चाहिए।

     इसलिए यह आक्षेप लगाना तर्कसंगत नहीं है कि बीएलओ द्वारा मतदाता सूची गलत तैयार की जा रही है क्योंकि बीएलओ के साथ सभी राजनीतिक दलों के बीएलए भी निरंतर उसके साथ रहकर मतदाता सूची त्रुटि रहित तैयार करने की प्रक्रिया में भागीदार हैं। 

     जब प्रारूप मतदाता सूची तैयार हो जाती है तो सम्बंधित मतदान केंद्र की मतदाता सूची का प्रकाशन सम्बंधित मतदान केंद्र पर किया जाता है और सूची के प्रकाशन के उपरांत उस मतदान केंद्र के मतदाताओं से दावे एवं आपत्तियां आमंत्रित की जाती हैं।

     इस समय मतदाता सूची सभी मतदाताओं के अवलोकनार्थ मतदान केंद्र पर रहती है जिसमें मतदाता अपने नाम के होने या ना होने की संतुष्टि मतदाता सूची देखकर कर सकते हैं।

     इसके साथ ही प्रारूप प्रकाशन की दिनांक को ही मतदाता सूची का एक एक सेट सभी राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को निःशुल्क दिया जाता है। ताकि वह उस प्रारूप मतदाता सूची का परीक्षण अपने बीएलए के माध्यम से त्रुटि रहित होने संबंधी जांच कर सके और यदि उनमें कोई नाम छूट गए हैं या कोई नाम जोड़ने हैं या कोई नाम मृत मतदाता के हैं और उन्हें काटना है या कोई मतदाता किसी अन्य स्थान पर चले जाने के कारण नाम हटाना है तो उन आपत्तियों को रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत कर अंतिम मतदाता सूची में नाम जोड़ने हटाने या विस्थापित करने की कार्रवाई करा सकते हैं।

     इन दावे आपत्तियों की समय सीमा समाप्त होने के पश्चात अंतिम मतदाता सूची तैयार किया जाता है और मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन प्रत्येक मतदान केंद्र पर किया जाता है। इस मतदाता सूची की एक एक प्रति निशुल्क सभी राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को उपलब्ध कराई जाती है। इस समय भी यदि कोई त्रुटि हो तो उसके निराकरण के लिए आवेदन पत्र रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किए जा सकते हैं ।

    अब आप ही विचार करने का प्रयास करें कि यदि 63,15,984 बूथ लेवल एजेंट 10,52,664 बूथ लेवल अधिकारियों अर्थात 6 बीएलए मिलकर 1 बीएलओ द्वारा किए जा रहे कार्य की निगरानी कर रहे हों तो फर्जी मतदाता सूची कैसे तैयार कर सकते हैं ?

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डा. रजनीश श्रीवास्तव, स्वतंत्र लेखक, इंदौर ​​​​​​