सन 2030 तक आधी आबादी पेयजल को तरसेगी  : गोयल

 इंदौर।  जल संरक्षण के निमित्त जल चालीसा लिखने वाले जल स्टार रमेश गोयल ने इंदौर में बताया कि भारत के 5723 विकासखंडों में से 60 प्रतिशत से अधिक डार्क जोन में जा चुके हैं यानी इन विकासखंडों में 80 प्रतिशत से अधिक भूजल का दोहन कर लिया है और ऐसे स्थानों में भूजल एक हजार फुट से अधिक गहराई तक जा चुका है। देश में तेजी से डार्क जोन की संख्या बढ रही है। भारत सहित पूरे विश्व में घोर पेय जल संकट उत्पन्न हो रहा है और प्राणी का जीवन खतरे में पड़ रहा है। यदि यही स्थिति रही तो सन 2030 तक आधी आबादी को पीने का पानी नहीं मिलेगा। श्री गोयल इंदौर में स्टेट प्रेस क्लब में रूबरू कार्यक्रम में पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। श्री गोयल ने कहा कि  चेन्नई में भूजल समाप्त होना, साउथ अफ्रीका की राजधानी केपटाउन में पानी समाप्त होना, आस्ट्रेलिया में पानी की कमी के कारण 5000 ऊंटों को गोली से मार देना जैसी कुछ ऐसी घटनाएं हुई हैं जो स्पष्ट रूप से जल की कमी के कारण होने वाली भयावह स्थिति की ओर इंगित करती है।

       श्री गोयल ने कहा कि आधुनिकीकरण की ओर अग्रसर सभ्यता व बढ़ती जनसंख्या के कारण जंगल कम होते जा रहे हैं। असंख्य वृक्ष काटने व मशीनीकरण से प्रदूषण व तापमान बढ़ रहा है। परिणाम स्वरूप जलवायु परिवर्तन हो रहा है जिसके कारण या तो अति वर्षा होती है जो बाढ़ के रूप में विनाश करती है या वर्षा कम होती है जिससे नदियों में जल घटता जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश की अधिकाँश नदियों में कूड़ा-कर्कट, गन्दगी व जहरीला कचरा डाला जा रहा है जो पीने के पानी की कमी को और बढ़ा रहा है। जल आपूर्ति के लिए नलकूपों द्वारा अधिक भूजल दोहन के कारण भूजल स्तर गिरता जा रहा है। प्रतिदिन आने वाले भूकम्प के कारणों में अति भूजल दोहन भी एक मुख्य कारण है।

श्री गोयल ने कहा कि देशवासी "मैं क्या कर सकता हूं" के भाव को लेकर चिंतन करें व पानी बर्बाद न करने का संकल्प करें। उन्होंने सुझाव दिया कि वर्षा जल संग्रहण, रेन वाटर हारवैस्टिंग व रिचार्जर के द्वारा पानी की कमी को कुछ कम किया जा सकता है। खेती में फव्वारा सिंचाई पद्धति का प्रयोग करें तथा अधिक पानी खपत वाली ऊपज धान व गन्ना के बजाय तैलीय व दलहन की खेती करें तथा तम्बाकू की खेती बिल्कुल न करें। संकल्प करें कि टोंटी कभी भी बेकार नहीं चलने देंगे। उन्होंने कहा कि हम सब मिलकर प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी के इस नारे को साकार करें कि वर्षा का जल, जहां भी गिरे जब भी गिरे, संग्रहित करें ताकि यह कहने की स्थिति ना आये - एक था राजा एक थी रानी और एक था पानी।

 हरियाणा के  सिरसा के श्री गोयल ने वर्ष 2012 में हनुमान चालीसा की तर्ज पर जल चालीसा लिखा है जिसकी हजारों प्रतियां वितरित की जा चुकी हैं। जल चालीसा को संगीतकार महावीर मुकेश के निर्देशन में गायिका पूर्णिमा ने गाया भी है। उन्होंने 108 चौपाईयों वाले जल मनका और बिन पानी सब सून पुस्तक भी लिखी है।