किडनी की सूजन को नजरअंदाज न करें

    भोपाल। किडनी से जुड़ी बीमारियां अक्सर शुरुआत में साधारण लगती हैं, लेकिन समय पर पहचान और सही इलाज न मिलने पर ये गंभीर रूप ले सकती हैं। खासतौर पर हाइड्रोनेफ्रोसिसयानी किडनी की सूजन ऐसी ही एक समस्या है, जो जन्म से भी हो सकती है या बाद में पथरी जैसी वजहों से विकसित हो जाती है।

     भोपाल के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के न्यूक्लियर मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. सुरुचि जैन के अनुसार, इस स्थिति में किडनी से मूत्र निकलने का रास्ता पेल्वीयूरेटरिक जंक्शन अवरोधित हो जाता है। इसके कारण किडनी पर दबाव बढ़ता है और वह धीरे-धीरे अपना सामान्य काम करना बंद कर सकती है। यदि इसे समय रहते नहीं पहचाना गया, तो किडनी को स्थायी नुकसान भी हो सकता है।

      डॉ. सुरुचि जैन बताती हैं कि आमतौर पर लोग शुरुआती जांच के लिए अल्ट्रासाउंड कराते हैं, जो केवल प्राथमिक जानकारी देता है। लेकिन बीमारी की गंभीरता, किडनी की वास्तविक कार्यक्षमता और ऑपरेशन की आवश्यकता का सही आकलन करने के लिए न्यूक्लियर मेडिसिन की विशेष जांच रीनल डाययूरेटिक स्कैन बेहद महत्वपूर्ण है। इस जांच से यह स्पष्ट हो जाता है कि अवरोध कितना है और किडनी कितनी प्रभावी तरीके से काम कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि यह जांच केवल बीमारी की पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि ऑपरेशन के बाद भी की जाती है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किडनी सही तरह से काम कर रही है और मूत्र का प्रवाह सामान्य हो गया है।

    डॉ. सुरुचि जैन के अनुसार, यदि पेट या कमर के आसपास लगातार दर्द, सूजन या पेशाब में किसी भी प्रकार की परेशानी महसूस हो रही हो, तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जिन लोगों को किडनी स्टोन या जन्मजात किडनी संबंधी समस्याओं का इतिहास रहा है, उन्हें नियमित रूप से जांच कराते रहना आवश्यक है, ताकि किसी भी संभावित जटिलता का समय रहते पता लगाया जा सके। वे यह भी सलाह देती हैं कि केवल अल्ट्रासाउंड जांच पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि डॉक्टर की सलाह के अनुसार उन्नत जांच कराना बेहद जरूरी है, जिससे बीमारी की सही स्थिति स्पष्ट हो सके। समय पर पहचान और उपचार से किडनी को गंभीर नुकसान से बचाया जा सकता है। कुल मिलाकर, किडनी से जुड़ी बीमारियों में जागरूकता और समय पर सही जांच ही सबसे प्रभावी बचाव का तरीका है।

      उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान भोपाल ऐसा प्रमुख सरकारी केंद्र है, जहां यह उन्नत सुविधा कम लागत में उपलब्ध है। यहां मरीजों को सटीक जांच और बेहतर उपचार की सुविधा मिल रही है।