दाँतों का काम आँतों से न लें
दाँतों का काम आँतों से न लें
बांग्ला भाषा में यदि किसी को पानी के पीने के लिए पूछेंगे तो कहना होगा "आपनी की जोल खाबेन?" हिंदी भाषियों को यह सुनने में थोड़ा अजीब सा लगता है कि क्या जल को भी खाया जाता है ? लेकिन इसके ठीक उलटा भोजन को पीजिए कहेंगे तो भी यह बात गले से नीचे नहीं उतरेगी। आमतौर पर कहा जाता है कि भोजन को मुंह में कम 32 बार चबाना चाहिए ताकि भोजन इतना तरल हो जाए कि भोजन आसानी से पच जाए। परन्तु आधुनिक जीवनशैली और भागदौड़ में हम भोजन को जल्दबाजी में निगल लेते हैं और उसका काम आँतों पर छोड़ देते हैं। यही कारण है कि आज गैस, अपच, कब्ज, एसिडिटी और पेट की अनेक समस्याएँ सामान्य हो गई हैं और बड़ी आबादी इन समस्याओं से ग्रसित है।
आँतें (Intestines) हमारे पाचन तंत्र का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। हम जो भोजन करते है, दांत उसे चबाते हैं और आंतें भोजन से शरीर का पोषण करने वाले तत्वों का निर्माण करती है । मनुष्य के शरीर की रचना इतनी अद्भुत है कि प्रत्येक अंग का अपना निश्चित कार्य है। आँखें देखने के लिए, कान सुनने के लिए, हृदय रक्त प्रवाहित करने के लिए और दाँत भोजन को चबाने के लिए हैं । यदि हम दांतों की बात करें तो ज्यादातर लोग दांतों के प्रति लापरवाह होते हैं और इसका एक प्रमुख कारण ठीक से देखभाल नहीं करना है। दांतों की देखभाल के साथ इनका उपयोग यानी भोजन अच्छे से चबा - चबाकर करना भी जरूरी है। स्वस्थ दांतों के लिए यह भी जरूरी होता है।
पाचन की पहली प्रयोगशाला
अधिकांश लोग मानते हैं कि भोजन को पचाने का काम आँतों का है और पाचन क्रिया पेट से शुरू होती है, जबकि वास्तविकता यह है कि पाचन की प्रक्रिया मुख से ही प्रारंभ हो जाती है। दाँत भोजन को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ते हैं और लार (सलाइवा) उसमें अच्छी तरह मिल जाती है। लार में उपस्थित एंजाइम स्टार्च को पचाने का काम शुरू कर देते हैं। यदि भोजन ठीक से चबाया ही नहीं गया तो भोजन को पचाने के लिए पेट और आँतों को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है।
दाँतों की जगह आँतों पर बोझ
कल्पना कीजिए कि किसी मशीन में बड़े-बड़े पत्थर डाल दिए जाएँ। मशीन पर कितना दबाव पड़ेगा! यही स्थिति हमारे पाचन तंत्र की होती है। जब बिना चबाया या अकाम चबाया भोजन पेट में पहुँचता है तो पेट को उसे तोड़ने के लिए अधिक अम्ल (एसिड) बनाना पड़ता है। इसके बाद आँतों को भी अधिक मेहनत करनी पड़ती है। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहे तो अपच, गैस, पेट फूलना, कब्ज और पोषक तत्वों के कम अवशोषण जैसी समस्याएँ पैदा हो जाती हैं।
जीवनशैली - दिनचर्या का प्रभाव
मोबाइल देखते हुए खाना, टीवी के सामने बैठकर भोजन करना, कार्यालय में पाँच-दस मिनट में खाना निपटा देना और फास्ट फूड को जल्दी-जल्दी निगल लेना, इन सब आदतों के कारण दाँतों का अपेक्षित उपयोग नहीं होता जिससे दांतों का व्यायाम नहीं हो पाता है। वर्तमान में अधिकांश लोग भोजन को चबाने की बजाय केवल निगलते हैं। परिणामस्वरूप पेट को वह काम करना पड़ता है जो वास्तव में दाँतों का है ।
हर कौर को समय दें
दन्त विशेषज्ञ कहते हैं क़ि भोजन के प्रत्येक कौर को लगभग 25 से 30 बार चबाना चाहिए। यद्यपि हर भोजन के लिए यह संख्या अलग - अलग हो सकती है, लेकिन सिद्धांत यही है कि भोजन इतना चबाया जाए कि वह लगभग मुलायम लेप जैसा बन जाए, लार के साथ भोजन तरल रूप में परिवर्तित हो जाए । भोजन को हम जितना अधिक चबाएँगे, उतनी अधिक लार मिलेगी और पाचन उतना ही आसानी होगा।
जल्दी खाने के नुकसान
जो लोग पाँच-दस मिनट में पूरा भोजन समाप्त कर लेते हैं, वे अक्सर आवश्यकता से अधिक खा लेते हैं। मस्तिष्क को यह संकेत मिलने में लगभग 20 मिनट लगते हैं कि पेट भर चुका है। जल्दी-जल्दी खाने वाले व्यक्ति को यह संकेत देर से मिलता है और तब तक वह जरूरत से अधिक भोजन कर चुका होता है। इससे मोटापा, मधुमेह और हृदय रोगों का जोखिम भी बढ़ सकता है।
बुजुर्गों के लिए विशेष महत्व
बढ़ती उम्र के साथ दाँत कमजोर होने लगते हैं या कई बार कृत्रिम दाँत लगाने पड़ते हैं। ऐसे में भोजन को अच्छी तरह चबाना और भी आवश्यक हो जाता है। यदि दाँतों की समस्या हो तो उसका उपचार कराना चाहिए। केवल मुलायम भोजन खाने से समस्या का समाधान नहीं होता, क्योंकि पाचन की प्रक्रिया में चबाना उतना ही आवश्यक है।
बच्चों को भी सिखाएँ
आज बच्चों में जंक फूड और पैकेट वाले खाद्य पदार्थों का चलन बढ़ रहा है। वे भी जल्दी-जल्दी भोजन करते हैं। यदि बचपन से ही उन्हें अच्छी तरह चबाकर खाने की आदत डाली जाए तो जीवनभर उनका पाचन बेहतर रहेगा। भोजन के समय मोबाइल और टीवी से दूरी भी उतनी ही आवश्यक है। वर्तमान समय में छोटे - छोटे बच्चों को मोबाइल की लत लग गयी है और इसके लिए उनके माता - पिता ही जिम्मेदार होते हैं इसलिए बच्चों को भोजन करने, दूध पीने आदि के लिए मनाने के लिए मोबाइल देखने का प्रलोभन देने से बचना चाहिए।
दाँतों की देखभाल भी जरूरी
यदि दाँत स्वस्थ नहीं होंगे तो व्यक्ति अच्छी तरह चबा भी नहीं पाएगा। इसलिए सुबह-शाम ब्रश करना, समय-समय पर दंत चिकित्सक से जाँच कराना, अत्यधिक मीठे खाद्य पदार्थों से बचना और दाँतों की सफाई बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। स्वस्थ दाँत केवल सुंदर मुस्कान नहीं देते, बल्कि स्वस्थ पाचन का आधार भी होते हैं।
प्रकृति का संदेश
गाय, भैंस, ऊँट और अन्य शाकाहारी पशुओं को देखिए। वे घंटों भोजन चबाते रहते हैं। मनुष्य के लिए भी प्रकृति ने दाँत दिए हैं ताकि वह भोजन को अच्छी तरह चबाकर खाए। यदि हम यह काम नहीं करेंगे तो पाचन तंत्र पर अनावश्यक दबाव पड़ेगा।
हम आधुनिक चिकित्सा, महँगी दवाइयों और पोषक आहार की चर्चा तो बहुत करते हैं, लेकिन स्वास्थ्य का सबसे सरल नियम भूल जाते हैं और वह नियम है भोजन को अच्छी तरह चबाकर खाना। यदि हम दाँतों का काम दाँतों से ही लें और आँतों पर अतिरिक्त बोझ नहीं डालेंगे तो अनेक पाचन संबंधी समस्याओं से बिना दवा के भी बचा जा सकता है।
इसलिए "धीरे खाइए, अच्छी तरह चबाइए और दाँतों का काम आँतों से मत लीजिए।" यही छोटी-सी आदत लंबे समय तक स्वस्थ, ऊर्जावान और रोगमुक्त जीवन की मजबूत नींव बन सकती है। (साभार )
================

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को बड़ा सम्मान, 1 अगस्त को मिलेगा लोकमान्य तिलक पुरस्कार
ब्रिटेन में सत्ता परिवर्तन, एंडी बर्नहैम बने नए प्रधानमंत्री; कीर स्टार्मर ने छोड़ा पद
शिप इंजीनियर रोहन की मौत से गांव में शोक, ईरान हमले ने छीनी एक और भारतीय की जान
कैलारस शक्कर कारखाने के मुद्दे पर जौरा विधायक पंकज उपाध्याय का विधानसभा परिसर में धरना