पार्श्वनाथ तीर्थ, सम्मेद शिखर को विकृत करने के प्रयासों का तीव्र विरोध किया जाएगा
पार्श्वनाथ तीर्थ, सम्मेद शिखर को विकृत करने के
प्रयासों का तीव्र विरोध किया जाएगा
इंदौर। श्री सम्मेद शिखर तीर्थ, पार्श्वनाथ हिल्स, जैनों का पुरातन सिद्ध तीर्थ में पिछले कुछ समय से लगातार अवांछित तत्वों द्वारा राजनैतिक प्रश्रय और बाहरी पैसों के आधार पर अधार्मिक कृत्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं और शांत जैन समाज को उद्वेलित कर, उबाल लाने की कोशिशें की जा रही हैं। मध्य प्रदेश जैन कांफ्रेंस के प्रमुख समंवयक एवं भारतीय राजस्व सेवा के सेवानिवृत्त सहायक आयुक्त श्री अरुण कुमार जैन ने प्रादेशिक कार्यकारिणी की बैठक में यह आरोप लगाते हुए कहा है कि जैनों को आक्रोशित करने की हरकतें नहीं सही जाएगी और कुत्सित प्रयासों का पुरजोर विरोध किया जाएगा।
श्री अरूण जैन ने कहा कि जैन समाज सदैव रचनात्मकता के साथ देश और समाज के हित में कार्य करते हुए चेरिटेबल एक्टिविटी में अपना पैसा और श्रम लगाता है। देश भर में चिकित्सालय, भोजन शालाएं, गौ शालाएं चलाते हुए सेवा कार्यों में अथक प्रयास करते हुए खुले हाथ से मदद करता आया है। उन्होने कहा कि सेवा के प्रकल्प पानी, पर्यावरण, वृक्षारोपण जल, जंगल, जमीन बचाने के मानव हित के कार्यों में सदैव तैयार रहता आया है और मदद को हमेशा तैयार रहता है। अल्पसंख्यक समाज होते हुए भी सबसे ज्यादा टैक्स देने वाला, देश का सर्वाधिक पढ़ा, लिखा समाज है।
इस अवसर पर मध्य प्रदेश जैन कांफ्रेंस के प्रादेशिक अध्यक्ष श्री हुलास जी बेताला ने बताया कि सन 1918 में 2,42,000 रूपये में जैन एसोसिएशन ने यह पहाड़ी तात्कालिक शासकों से खरीदी थी, जबकि यह पहाडी सैकड़ों वर्षों से जैन समाज के आधिपत्य में ही थी। उन्होने कहा कि जैन समाज के 24 में से 20 तीर्थंकरों की मोक्षस्थली होकर यह अत्यंत पवित्र पहाड़ी है और इस पर आधिपत्य की अवैधानिक कोशिशों और उस पर किसी भी राजनैतिक व्यक्ति की प्रतिमा लगाने की कोशिशों का विधिक और लौकिक रूप में तीव्र विरोध होगा। श्री बेताला ने कहा कि जैन समाज प्रेम, अहिंसा और शांति में विश्वास रखता है, इसे कायरता न समझा जाए। उन्होने जोर देते हुए कहा कि हम हर हालत में ऐसे कुत्सित प्रयासों का विश्वव्यापी विरोध करेंगे।
मध्यप्रदेश जैन कांफ्रेंस की कार्यकारिणी की आज इंदौर में एक तात्कालिक बैठक चिड़ियाघर के सामने स्थित माहेश्वरी धर्मशाला में आयोजित की गई। बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर झारखंड की पार्श्वनाथ हिल्स पर सम्मेदशिखर जी क्षेत्र में कतिपय राजनैतिक तत्वों द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री की प्रतिमा लगाने के प्रस्ताव का अहिंसक तरीके से पुरजोर विरोध करने का निर्णय लिया गया। ज्ञातव्य है कि सम्मेदशिखर पहाड़ी पूर्ण रुपेण जैन समाज की सैकड़ों सालों से पूजित पुरातन धरोहर है।
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