शुभ प्रभात ....... आज का चिंतन

उतना नहीं...

  • संजय अग्रवाल  

एक कुत्ते को जोर-जोर से रोते देख शिष्य ने संत से पूछा कि कुत्ता क्यों रो रहा है तो संत ने बताया कि वह जहां बैठा है, वहां कोई नुकीली चीज उसे चुभ रही है। शिष्य ने पूछा तो वह वहां से उठ क्यों नहीं जाता ?  संत बोले... उसे उतना नहीं चुभ रहा है।

जीवन में...

हम कई बार उन कष्टों को अनावश्यक ही भोगते हैं। उनसे बच सकते हैं।  उनसे हम पार पा सकते हैं लेकिन अपने आलस, कमजोरी, अनिच्छा इत्यादि के कारण हम प्रयास ही नहीं करते हैं और निरंतर कष्ट पाते रहते हैं। इस कष्ट को दूर करने का उपाय हमें ही करना होता है।

चुभता है..

यदि हमें कुछ अप्रिय लग रहा है तो हम उसके बारे में स्पष्ट रूप से बता दें।  उस से सामने वाला आवश्यक सुधार कर सकता है। चर्चा करने से कई बार यह भी होता है कि हमें वास्तविकता का पता चलता है और समझ में आता है कि हमसे ही समझने में गलती हो रही थी।

क्या करें..

हमारे नियंत्रण में जो कुछ भी है, उतना प्रयास हम अवश्य करें ताकि हमें भविष्य में खेद या अफसोस ना रहे और जो कुछ हमारे नियंत्रण में नहीं है उसको हम सहज भाव से स्वीकार करें, यही अभीष्ट होता है।

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श्री संजय अग्रवाल आयकर विभागनागपुर में संयुक्त आयकर आयुक्त हैं. वे हमेशा लोगों से सम्पर्क और संवाद करने के लिये इच्छुक रहते हैं इसीलिए वे संपर्कसंवाद और सृजन में सबसे अधिक विश्वास करते हैं।  मानवीय मूल्यों और सम्बंधों के सूक्ष्म विश्लेषण के चितेरे श्री अग्रवाल "आज का चिंतन" नियमित रूप से लिख रहे हैं