हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं…………….

वैश्विक परिप्रेक्ष्य में हिंदी दिवस मनाने का औचित्य

  •   ओंकार कोसे

       भाषा किसी भी राष्ट्र की आत्मा और विशिष्ट पहचान होती है। यह केवल संचार का माध्यम नहीं बल्कि संस्कृति, परंपरा और सभ्यता की जीवंत अभिव्यक्ति है। भारत जैसे बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक देश में हिंदी का महत्व और भी अधिक हो जाता  है। हिंदी केवल भारत की राजभाषा है, बल्कि यह विश्व की सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है।

            14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को भारत की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया और इस निर्णय को स्मरणीय बनाने के लिए हर वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। भारत बहुत विशाल बहुभाषी राष्ट्र है जिसमें कई प्रदेश है जो भाषा के आधार पर बने हैं,  जिनकी अपनी  राज्य की राजभाषा भी है।  इसलिए उन राज्यों में हिंदी का व्यापक प्रचार - प्रसार अभी होना बाकी है जिसके कारण हिंदी के प्रचार - प्रसार के दृष्टिकोण से हिंदी दिवस भारत के सभी मंत्रालयों, हिंदी सेवी  संस्थाओं, स्कूलों, विश्वविद्यालयों और भारतीय दूतावासों में मनाया जाता है।
          आज के वैश्वीकरण (Globalization) के युग में जब दुनिया एक वैश्विक गाँव बन गई है तो हिंदी दिवस मनाने का महत्व और औचित्य और भी बढ़ गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार और व्यापार के अवसरों को हासिल करने के लिए केवल अपने लोगों को अपनी भाषा में प्रवीण  बनाना है बल्कि  विदेशियों को भी हमारी भाषा में प्रशिक्षित करना अनिवार्य है ताकि हम अपनी भाषा के माध्यम से ही आसानी से रोजगार, व्यापार, पर्यटन और कूटनीतिक संबंधों से लाभ उठा सके।   विज्ञान, तकनीकी, विधि और वाणिज्य आदि विषयों में विश्व स्तरीय शिक्षा की व्यवस्था भारतीय विश्वविद्यालय में की जानी चाहिए।

हिंदी दिवस मनाने का औचित्य

हिंदी दिवस मनाने के पीछे सुनियोजित और दूरगामी रणनीति हैं, जो केवल राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

1. राष्ट्रीय एकता और पहचान का प्रतीक

भारत के संविधान में 22 मान्यता प्राप्त भाषाएँ हैं लेकिन देश में सैकड़ों बोलियाँ बोली जाती हैं। ऐसे में हिंदी राष्ट्र की सामान्य संपर्क भाषा (Link Language) के रूप में काम करती है।

  • हिंदी दिवस हमें यह स्मरण दिलाता है कि विविधता में एकता बनाए रखने के लिए देश में एक भाषा का होना आवश्यक है।
  • यह राष्ट्रीय एकता और अखंडता का प्रतीक है।
  • देश की समृद्धि और सांस्कृतिक विरासत को संजोने के लिए भी जरूरी है।
  •  जिस तरह फ्रांस में फ्रेंच, जर्मनी में जर्मन और चीन में मंदारिन राष्ट्रीय एकता का आधार हैं, वैसे ही भारत में हिंदी का स्थान होना चाहिए।

2. संवैधानिक मान्यता का सम्मान

  • 14 सितंबर 1949 को देवनागरी लिपि में लिखी हिंदी को भारत की राजभाषा घोषित किया गया।
  • यह तिथि हमें हमारे संवैधानिक उत्तरदायित्व की याद दिलाती है कि हमें हिंदी का प्रचार-प्रसार करना और इसे सम्मान देना चाहिए।
     
  • हिंदी दिवस मनाना संविधान के इस महत्वपूर्ण निर्णय को सामूहिक रूप से जनहित में स्वीकार करना है।

3. राष्ट्रभाषा और सांस्कृतिक गौरव की रक्षा

आज के समय में विदेशी भाषाओं, विशेषकर अंग्रेज़ी, का प्रभाव बढ़ रहा है।

  • कई लोग हिंदी बोलने में संकोच महसूस करते हैं और हीन भावना से ग्रसित महसूस करते हैं।
     
  • हिंदी दिवस हमें यह सिखाता है कि अपनी मातृभाषा और राष्ट्र भाषा पर गर्व करना चाहिए।
     
  • जिस प्रकार जापान और फ्रांस अपने सभी वैज्ञानिक और तकनीकी कार्य फ्रेंच और  जापानी भाषा में करते हैं, उसी प्रकार भारत को भी हिंदी का प्रयोग बढ़ाना चाहिए।
     
  • यह हमारे सांस्कृतिक अस्तित्व और भाषाई गौरव की रक्षा के लिए आवश्यक है।

4. वैश्विक परिप्रेक्ष्य में हिंदी का महत्व

हिंदी अब केवल भारत की भाषा नहीं रही, यह वैश्विक भाषा का स्वरूप ले चुकी है।

() विश्व में हिंदी बोलने वालों की संख्या

  • हिंदी विश्व की तीसरी सबसे बड़ी बोली जाने वाली भाषा है।
     
  • लगभग 60 करोड़ लोग हिंदी बोलते हैं, और यदि इसे समझने वाले लोगों को शामिल करें तो यह संख्या 80 करोड़ से अधिक तक हो जाती है।
  • अमेरिका, कनाडा, यूके, आस्ट्रेलिया, अरब देश, पाकिस्तान, बांग्लादेश, मॉरीशस, फिजी, नेपाल, सूरीनाम जैसे देशों में बड़ी संख्या में हिंदी भाषी लोग रहते हैं जो आपसी व्यवहार में हिंदी भाषा का प्रयोग करते है। हिंदी फिल्में खूब देखते और संगीत सुनते हैं ।  

() वैश्विक स्तर पर  हिंदी

 

 वैश्विक स्तर पर इसका महत्व लगातार बढ़ रहा है। हिंदी को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी मान्यता मिल रही है और यूनेस्को सहित विभिन्न संगठन इसे बढ़ावा दे रहे हैं। हालांकि सरकारी कामकाज और उच्च तकनीकी क्षेत्रों में अभी भी अंग्रेजी का प्रभाव अधिक है लेकिन अंग्रेजी के बाद सरकारी और न्यायालयीन कामकाज में किसी भी भाषा का प्रयोग अधिक हो रहा है तो वह हिंदी है। छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में तो हिंदी का उपयोग लगातार बढ़ रहा है।

  • संयुक्त राष्ट्र (UN) में हिंदी को आधिकारिक भाषा का दर्जा दिलाने के प्रयास हो रहे हैं।  फिलहाल समस्या भारत सरकार की वित्तीय सहायता है। संयुक्त राष्ट्र में हिंदी का प्रयोग मुख्य रूप से समाचार प्रसारण, सोशल मीडिया और कार्यक्रमों में होता है,
  • गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, अमेज़न, फेसबुक जैसी वैश्विक कंपनियों ने अपने प्लेटफ़ॉर्म पर हिंदी को प्राथमिक भाषाओं में शामिल किया है।
  • नेटफ्लिक्स, यूट्यूब, इंस्टाग्राम  जैसे डिजिटल मंचों पर हिंदी सामग्री की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।

() आर्थिक दृष्टिकोण से हिंदी

  • भारतीय बाज़ार दुनिया के सबसे बड़े बाज़ारों में से एक है।
     
  • कंपनियाँ उपभोक्ताओं तक पहुँचने के लिए विज्ञापन आदि में हिंदी का प्रयोग करती हैं।
     
  • हिंदी भाषा का ज्ञान और मनोरंजन उद्योग अब रोज़गार और व्यापार के नए अवसर भी प्रदान कर रहा है।

5. विज्ञान, तकनीक और शिक्षा में हिंदी का महत्व

  • यदि विज्ञान और तकनीक का ज्ञान हिंदी में उपलब्ध कराया जाए, तो यह ग्रामीण और वंचित वर्गों के लिए आसान और सुलभ होगा।
  • इज़राइल ने अपनी तकनीकी शिक्षा हिब्रू में दी और वह तकनीकी महाशक्ति बन गया । उसी प्रकार भारत भी हिंदी के माध्यम से महाशक्ति बन सकता है।
     
  •  हिंदी में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देना भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) भी मातृभाषा के साथ साथ हिंदी के प्रयोग को प्रोत्साहित करती है। त्रिभाषा फार्मूले को देश के अधिकांश राज्यों ने स्वीकार कर लिया है जिसके अच्छे परिणाम रहे हैं।

6. साहित्य और सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण

  • हिंदी साहित्य विश्व के श्रेष्ठ साहित्य में गिना जाता है।
     
  • तुलसीदास, कबीर, जयशंकर प्रसाद, प्रेमचंद, हरिवंश राय बच्चन और महादेवी वर्मा जैसे साहित्यकारों की रचनाएँ आज भी लोगों का ज्ञानवर्धन भाषा सीखने को प्रेरित करती हैं।
     
  • हिंदी दिवस के आयोजन से अनुवाद, पत्रकारिता, साहित्य, कविता, नाटक और लोककलाओं के संरक्षण और संवर्धन पर चिंतन होता है।  इसके माध्यम से  हिंदी भाषा और साहित्य की समृद्ध विरासत का परिचय प्राप्त होता है।

7. युवाओं और नई पीढ़ी को प्रेरित करना

  • आज की नई पीढ़ी का झुकाव अंग्रेज़ी और विदेशी भाषाओं की ओर बढ़ रहा है। ऐसा शिक्षा, व्यापार और रोजगार में अंग्रेजी के प्रभुत्व के कारण है। यदि हिंदी में भी शिक्षा, वाणिज्य, विधि, व्यापार के अवसर पैदा किए जाए तो युवाओं का रुझान इस ओर भी बढ़ेगा। कई राज्य सरकारों में विज्ञान, चिकित्सा और विधि की उच्च शिक्षा हिंदी में देना शुरू कर दी है। यह स्वागत योग्य कदम है।
  • हिंदी दिवस मनाकर उन्हें यह प्रेरणा दी जा सकती है कि हिंदी बोलना आधुनिकता के विरुद्ध नहीं, बल्कि यह स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। हिंदी भाषा के माध्यम से भी रोजगार और व्यापार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध है।
     
  • डिजिटल माध्यमों जैसे ब्लॉगिंग, यूट्यूब, और सोशल मीडिया के जरिए हिंदी का कार्य  तेजी से बढ़ रहा है। इंटरनेट पर उपलब्ध हिंदी सामग्री को हिंदी प्रयोक्ताओं द्वारा खूब पसंद किया जा रहा है जिससे युवाओं को प्रशस्ति भी मिल रही है और पैसा भी।
  • अनुवादकों को अंग्रेजी के अलावा विश्व की श्रेष्ठ भाषाओं का उच्च स्तरीय साहित्य, शिक्षा, विज्ञान आदि विषयों की सामग्री का अनुवाद हिंदी में करके हिंदी को समृद्ध बनाकर बड़ी भाषा बनाने का प्रयास करना चाहिए।

8. वैश्वीकरण और हिंदी की भूमिका

  • वैश्वीकरण के दौर में भाषा एक आर्थिक शक्ति बन गई है। भाषा और साहित्य के माध्यम से कमाई देश को और नागरिकों को हो रही है।
     
  • हिंदी सिनेमा (बॉलीवुड) विश्व भर में लोकप्रिय है, जिससे हिंदी की सॉफ्ट पावर बढ़ रही है। कलाकारों और सरकार के लिए आमदनी का बड़ा साधन सिनेमा बन गया है।
     
  • हिंदी दिवस इस बात को रेखांकित करता है कि हमें अपनी भाषा का प्रयोग वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करके अवसरों को हासिल करने के लिए करना चाहिए।

हिंदी दिवस मनाना केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम भर नहीं है बल्कि यह राष्ट्रीय चेतना जगाने और वैश्विक पहचान बनाने का प्रयास है।

  • यह हमें याद दिलाता है कि अपनी भाषा को बढ़ावा दिए बिना कोई भी राष्ट्र विकास की ऊँचाइयों को नहीं छू सकता।
  • जब विश्व के विकसित राष्ट्र अपनी भाषाओं को प्राथमिकता देते हैं, तो भारत के लिए भी आवश्यक है कि वह हिंदी को विज्ञान, तकनीक, शिक्षा, व्यापार और शासन के हर क्षेत्र में बढ़ावा दे।
     
  • हिंदी दिवस मनाकर हम केवल अपनी राष्ट्रभाषा राजभाषा का सम्मान करते हैं बल्कि आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देते हैं कि भाषा ही राष्ट्र की आत्मा और पहचान है।

हिंदी दिवस के अवसर पर हिंदी के विकास के लिए देश के नीति निर्माताओं के अलावा शिक्षाविदों, साहित्यकारों, कलाकारों, पत्रकारों सहित आम जनता का दायित्व है कि वे हिंदी के विकास में अपना सर्वोत्तपरि योगदान दें तो हिंदी विश्व की सर्वश्रेष्ठ और सबसे बड़ी भाषा कुछ ही समय में बन सकती है।

भारत सरकार  द्वारा राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के सुझाव पर हिंदी दिवस मनाने का कार्यक्रम शुरू किया जिससे आजादी के 78 वर्षों बाद हिंदी की अभूतपूर्व प्रगति हुई है। देश के हिंदी प्रदेशों से निकलकर हिंदी विश्व के प्रत्येक देश तक पहुंच गई है। आज हिंदी 150 से अधिक विदेशी  विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जा रही है। वर्तमान में  केंद्र सरकार के सरकारी कार्यालयों और हिंदी भाषी प्रदेशों की राज्य सरकारों का सारा कार्य हिंदी में हो रहा है। फिल्मों, मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से हिंदीतर भाषाभाषी क्षेत्रों में भी हिंदी का बहुत प्रचार हुआ है। वहां  भी अब बोलचाल में हिंदी के प्रयोग में किसी प्रकार की  कोई समस्या नहीं होती है। हिंदी का इतना विकास हिंदी दिवस, हिंदी पखवाड़ा और विश्व हिंदी सम्मेलन आदि कार्यक्रमों के माध्यम से ही हुआ है, इस बात में कोई शक नहीं है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि हिंदी दिवस, हिंदी पखवाड़ा आदि मनाने का हिंदी के विकास में निश्चित रूप से औचित्य है। इसे और अधिक व्यापक स्तर पर मनाने की आवश्यकता है।

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श्री ओंकार कोसे पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल, मुख्यालय रतलाम में राजभाषा विभाग में पदस्थ थे। सेवानिवृत्ति के पश्चात भोपाल में निवास। हिंदी के प्रचार – प्रसार के लिए सतत प्रयत्नशील श्री कोसे सम सामयिक विषयों पर भी अपनी कलम चलाते हैं