साय कैबिनेट का फैसला, विकास और कल्याण योजनाओं को मिलेगा बल
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय (महानदी भवन) में राज्य मंत्रिपरिषद की एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस हाई-प्रोफाइल बैठक में छत्तीसगढ़ के सर्वांगीण विकास, प्रशासनिक सुधारों और सीधे जनहित से जुड़े कई दूरगामी और ऐतिहासिक प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। कैबिनेट ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए तीन बड़े नीतिगत फैसलों के प्रारूप को हरी झंडी दे दी है।
1. वीबी-जी राम जी योजना: अब हर साल मिलेगा 125 दिनों का गारंटीकृत रोजगार
छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में डिजिटल सुशासन, महिला सशक्तीकरण और विभागीय योजनाओं के बेहतर तालमेल को बढ़ावा देने के लिए कैबिनेट ने एक युगांतकारी कदम उठाया है। सरकार ने ’’विकसित भारत – रोजगार और आजीविका के लिये गारंटी मिशन (ग्रामीण) : वीबी-जी राम जी योजना छत्तीसगढ़’’ के प्रारूप को मंजूरी दे दी है।
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कानूनी गारंटी: भारत सरकार के अधिनियम, 2025 के प्रावधानों के तहत लागू होने वाली इस योजना के अंतर्गत प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के पात्र परिवारों के वयस्क सदस्यों को अब एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के अकुशल श्रम आधारित रोजगार की वैधानिक (कानूनी) गारंटी मिलेगी।
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विकास कार्य: इस मिशन के तहत गांवों में जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन, पक्के ग्रामीण इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण और टिकाऊ संपत्तियों का विकास किया जाएगा।
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आधुनिक तकनीक और बजट: पारदर्शिता और सुशासन को मजबूत करने के लिए इसमें 'पीएम गति शक्ति' पोर्टल और आधुनिक डिजिटल प्रणालियों का उपयोग किया जाएगा। इस योजना में केंद्र और राज्य सरकार के बीच खर्च का अनुपात 60:40 का होगा। सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के राज्य बजट में इसके लिए 4,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम वित्तीय प्रावधान किया है।
2. 'अटल आजीविका समृद्धि हाट' योजना: ग्रामीण इलाकों में खुलेंगे प्रोसेसिंग और डिजिटल सेवा केंद्र
गांवों से पलायन रोकने और स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार को पंख देने के उद्देश्य से मंत्रिपरिषद ने ’’अटल आजीविका समृद्धि हाट’’ योजना शुरू करने का एक और संवेदनशील फैसला लिया है। इस योजना के जरिए ग्रामीण अंचलों में बहुउद्देशीय व्यावसायिक केंद्रों का जाल बिछाया जाएगा:
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सृजन और प्रसंस्करण इकाइयां: गांवों में हथकरघा, सिलाई-बुनाई और हस्तशिल्प के लिए विशेष 'सृजन केंद्र' बनाए जाएंगे। इसके अलावा दलहन, तिलहन, लघु राइस मिल और डेयरी उत्पादों के लिए 'प्रसंस्करण इकाइयां' (प्रोसेसिंग यूनिट्स) स्थापित होंगी।
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हाई-टेक सेवा केंद्र: किसानों और ग्रामीणों की सहूलियत के लिए कोल्ड स्टोरेज, सोलर ड्रायर, कृषि उपकरणों की मरम्मत की दुकानें और 'अटल डिजिटल केंद्र' खोले जाएंगे।
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नोडल एजेंसी: इस महत्वाकांक्षी योजना को जमीनी स्तर पर उतारने के लिए 'छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन' को नोडल एजेंसी और 'पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग' को मुख्य नोडल विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे कृषि, खाद्य प्रसंस्करण और हरित ऊर्जा क्षेत्र को एक नया संबल मिलेगा।
3. छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति (CG-CBG Policy), 2026: कचरे से बनेगी स्वच्छ गैस
पर्यावरण संरक्षण और हरित ऊर्जा की दिशा में कदम बढ़ाते हुए कैबिनेट ने “छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति, 2026” के अंतिम प्रारूप का अनुमोदन कर दिया है। इस दूरदर्शी नीति के जरिए राज्य में कचरा प्रबंधन की समस्या का वैज्ञानिक समाधान निकाला जाएगा:
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जैविक संसाधनों का उपयोग: खेतों में बचने वाले पराली व कृषि अवशेषों, शहरों के ठोस कचरे (सॉलिड वेस्ट), गोबर और अन्य जैविक अपशिष्टों को रिसाइकल करके उन्हें स्वच्छ गैसीय ईंधन (कम्प्रेस्ड बायोगैस - CBG) में बदला जाएगा।
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5 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य: 'छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047' के रोडमैप के अनुसार, राज्य में हर साल लगभग 5 लाख टन कंप्रेस्ड बायोगैस उत्पादन करने की अपार क्षमता मौजूद है। इस नीति के लागू होने से न सिर्फ पर्यावरण बचेगा, बल्कि बड़े पैमाने पर जैविक उर्वरक (खाद) का उत्पादन भी होगा जिससे ग्रामीण समृद्धि बढ़ेगी।
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नोडल प्राधिकरण: इस पूरी नीति के सुचारू संचालन के लिए 'छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण' को राज्य की मुख्य नोडल एजेंसी बनाया गया है, जबकि ऊर्जा विभाग को प्रशासनिक आदेश और गाइडलाइंस जारी करने के लिए अधिकृत किया गया है।

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