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आज का चिंतन

 

  • संजय अग्रवाल  

भय से मुक्ति..

 

भय के प्रमुख कारण

शारीरिक अक्षमता,

मन की कमजोरी,

जानकारी का अभाव,

दूरी या अंजानापन,

अविश्वास, अनहोनी की आशंका,

आत्मविश्वास की कमी,

पुराने कटु अनुभव

 इत्यादि होते हैं।

 

डर से मुक्ति..

यदि कारण

समाप्त हो जाए तो

निवारण हो जाता है,

चाहे वह डर हो,

बीमारी हो या

अन्य कोई समस्या हो।

शारीरिक अक्षमता को

दूर नहीं किया जा सकता

किंतु

अपनी अन्य क्षमताओं को

बेहतर तरीके से और

अधिकतम सीमा तक

विकसित करके,

डर पर विजय

पाई जा सकती है।

पुराने बुरे अनुभव और

यादों को भूलकर,

नए विचार, नई ऊर्जा से,

निरंतर नए कार्य करें,

जानकारी प्राप्त करें और

नवीन अनुभव लेते जाएं तो

उस प्रकार के भय से

अवश्य ही मुक्त

हुआ जा सकता है।

मन की कमजोरी,

अविश्वास, अनहोनी की आशंका,

आत्मविश्वास की कमी इत्यादि

यह सब हमारी सोच,

हमारे अंदरूनी भाव होते हैं

जिनको हम नियंत्रित और

अपनी अनुकूलता से

संचालित कर सकते हैं किंतु

इसके लिए गहन अभ्यास की

आवश्यकता होती है।

 

विचार शक्ति और संगति...

इन दोनों में बड़ा गहरा संबंध है।

संगति (व्यक्ति, वस्तु, वातावरण या प्रकृति की) का

 प्रभाव हमारे विचारों पर और

तदनुसार कार्यों तथा व्यवहार पर

अवश्य ही पड़ता है।

संगति के प्रति सदैव

सजग रहकर उत्तम और

श्रेष्ठ का चयन करना चाहिए।

हमारी सोच की दिशा

सदैव सही हो,

ह सुनिश्चित करना चाहिए।

 

क्या करें...

यदि हम प्रतिक्षण

सजग रहते हुए,

अपने समस्त समय,

ऊर्जा और चेतना को

सकारात्मक कार्यों,

विचार और व्यवहार में

लगाते हैं तो हम

निश्चित रूप से

भय की स्थिति से

मुक्त हो सकते हैं

और यही समाधान होता है।

हमेशा इस बात पर

बल दिया जाता है कि 

हम सदैव जागरूक रहे,

अपने विचारों, अपने कार्यों और

अपने व्यवहार तथा 

आचरण के प्रति,

हम हर पल सचेत रहें।

हम अपनी चेतना और

जागरूकता के प्रति

सदैव सतर्क रहें और

कार्य करें,

यही अभीष्ट होता है।

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श्री संजय अग्रवाल आयकर विभागनागपुर में संयुक्त आयकर आयुक्त हैं. वे हमेशा लोगों से सम्पर्क और संवाद करने के लिये इच्छुक रहते हैं इसीलिए वे संपर्कसंवाद और सृजन में सबसे अधिक विश्वास करते हैं  मानवीय मूल्यों और सम्बंधों के सूक्ष्म विश्लेषण के चितेरे श्री अग्रवाल "आज का चिंतन" नियमित रूप से लिख रहे हैं