आपका दिन शुभ हो, मंगलमय हो ...................... आज का चिंतन..........................दो घर की देहरी.................. संजय अग्रवाल
आपका दिन शुभ हो, मंगलमय हो
आज का चिंतन
- संजय अग्रवाल
दो घर की देहरी
घर से जिम या पार्क,
बाद में कार्यस्थल, बाजार और
वापस घर, बस प्रतिदिन
इतना ही जाना आना
रह गया है।
मिलने जुलने के लिए
किसी के घर जाना
न्यूनतम हो गया है।
वर्ष भर में कितने ऐसे
दिन होते हैं जब हम
अपने घर के अलावा
किसी दूसरे घर की
देहरी चढ़ते हैं।
संपर्क और संवाद
यह न केवल संबंधों की
दृढ़ता और कार्य साधना के लिए
आवश्यक होता है अपितु
मानसिक और भावनात्मक
स्वास्थ्य की बेहतरी के लिए भी
अनिवार्य होता है।
प्रत्यक्ष मुलाकात
सबसे उत्तम और प्रभावी
तरीका होता है
संपर्क और संवाद का।
समाज और संस्कृति
जब हम एक दूसरे के घर
जाते हैं तो न केवल
सामाजिक ताना-बाना
सुदृढ़ होता है अपितु
सांस्कृतिक मूल्य भी
स्थापित होते हैं,
विस्तार पाते हैं।
वातावरण और संगति के
प्रभाव अद्भुत होते हैं।
हम संकोच के कारण
दूसरों के घर नहीं जाते
लेकिन सच्चाई यह है कि
यदि आप किसी के घर
पहुंचते हैं तो
उसे खुशी अवश्य होती है।
क्या करें
यथा संभव एक दूसरे के
घरों में आने जाने के
प्रयास को विस्तार दें,
संकोच और पूर्वाग्रह से
बाहर निकलकर
अपनी ओर से पहल करें,
सहज रूप से
सौजन्य भेंट ही
महत्वपूर्ण होती है।
एक दूसरे के
हाल-चाल पूछते रहें,
बताते रहें,
यही वर्तमान समय की
सबसे बड़ी
सेवा और सहयोग है।
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श्री संजय अग्रवाल आयकर विभाग, नागपुर में संयुक्त आयकर आयुक्त हैं. वे हमेशा लोगों से सम्पर्क और संवाद करने के लिये इच्छुक रहते हैं। इसीलिए वे संपर्क, संवाद और सृजन में सबसे अधिक विश्वास करते हैं। मानवीय मूल्यों और सम्बंधों के सूक्ष्म विश्लेषण के चितेरे श्री अग्रवाल "आज का चिंतन" नियमित रूप से लिख रहे हैं।

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