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आज का चिंतन

  • संजय अग्रवाल  

करोड़पति नहीं हजारपति

 

यदि कोई अमीर होता है तो

कहते हैं कि वह करोड़पति है।

धन, समृद्धि का

पैमाना माना जाता है।

दूसरी और किसी भी विधा में

श्रेष्ठता का आकलन

इस बात से होता है कि

आपने उस विधा में

कितने सौ या

हजार घंटे दिए हैं, लगाए हैं।

 

महारत

यदि किसी भी विषय,

कला, कार्य इत्यादि में

महारत, विशेषज्ञता या विशिष्टता

अर्जित करनी हो तो

उसमें रुचि और लगन

होना अनिवार्य है और

उसमें समय और ऊर्जा का

निवेश करना ही होता है,

यह एक मूलभूत सत्य है।

विशेषज्ञता का एक महत्वपूर्ण

मापक यह होता है कि

आपने उसमें कितने

सौ या हजार घंटे दिए हैं

या लगाए हैं।

 

हजारपति बनिए

हम स्वयं का आकलन करें कि

किस विशेष कार्य में हमने

1000 से अधिक घंटों का

निवेश किया है।

यदि हमने किसी कार्य में

पर्याप्त समय ही नहीं दिया है तो

उसमें हमें माहिती आएगी कैसे?

जो भी विशेषज्ञ

हमें अपने आसपास

दिखाई देते हैं

उन सभी में यह तथ्य

समान रूप से

देखने में मिलता है कि

उन्होंने उस कार्य या विधा में,

उसकी साधना में,

अपने हजारों घंटे का

निवेश किया हुआ होता है।

 

यदि आप

यदि आप किसी भी कार्य

या विधा में विशेषज्ञता

अर्जित करना चाहते हैं तो

आपको सजग रहते हुए,

निरंतर नियमित रूप से,

अनुशासन और समर्पण के साथ,

उसमें समय और ऊर्जा का

निवेश करना ही होगा,

यही अभीष्ट होता है।

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श्री संजय अग्रवाल आयकर विभागनागपुर में संयुक्त आयकर आयुक्त हैं. वे हमेशा लोगों से सम्पर्क और संवाद करने के लिये इच्छुक रहते हैं इसीलिए वे संपर्कसंवाद और सृजन में सबसे अधिक विश्वास करते हैं  मानवीय मूल्यों और सम्बंधों के सूक्ष्म विश्लेषण के चितेरे श्री अग्रवाल "आज का चिंतन" नियमित रूप से लिख रहे हैं