शुभ प्रभात ....... आज का चिंतन ............................ संपर्क और संवाद.............................. संजय अग्रवाल
शुभ प्रभात ....... आज का चिंतन
संपर्क और संवाद
- संजय अग्रवाल
- जीवन में सफलता के लिए,प्रसन्नता के लिए, प्रगति के लिए, संपर्क और संवाद करना न केवल आवश्यक है अपितु अनिवार्य है। अनुसंधानकर्ता, एकांतवासी, कर्म विशेषज्ञ, चिंतक, विचारक इत्यादि अपवाद हो सकते हैं।
संपर्क में सावधानी
हम व्यक्तियों के अलावा वस्तुओं एवं वातावरण के संपर्क में भी आते हैं और उनका अच्छा या बुरा प्रभाव हमारे ऊपर निश्चित रूप से पड़ता है। अतः हमें सावधान रहना होगा कि हम सदैव सकारात्मक और ऊर्जावान व्यक्ति, वस्तु आदि के संपर्क में रहने का प्रयत्न करें। और गलत या नकारात्मक व्यक्ति वस्तु और वातावरण से होने वाले दुष्प्रभाव से स्वयं को बचाएं।
संवाद
परस्पर संवाद किसी भी संबंध या रिश्ते का मूल है। मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मनभेद ना हो, इसके लिए संवाद की निरंतरता अनिवार्य है। अन्यथा, संवाद के अभाव में संबंध और रिश्ते शनै: शनै: कमजोर होते जाते हैं।
निहित/स्वाभाविक लाभ
संपर्क और संवाद से न केवल हमें नई नई जानकारियां प्राप्त होती हैं बल्कि समस्याओं के समाधान भी मिलते हैं, नई दिशाएं दिखती हैं और नए अवसरों के कई द्वार खुल जाते हैं।
स्वास्थ्य
सकारात्मक संपर्क और संवाद के माध्यम से हम मानसिक रूप से सदा स्वस्थ रह सकते हैं यह निश्चित है। और इसके अभाव में पूर्ण स्वास्थ्य की हानि भी..।
मिलना ही क्यों है
आज जब संचार, संप्रेषण और संवाद के अनेक माध्यम जैसे मोबाइल, व्हाट्सएप, इंस्टा इत्यादि उपलब्ध हो गए हैं तो प्रश्न आता है कि किसी से जाकर मिलने की आवश्यकता ही क्या है? लेकिन, सच तो यह है कि जब हम व्हाट्सएप चैट करते हैं या फोन पर बातचीत करते हैं, तब बौद्धिक चर्चा हो जाती है, समाचारों का आदान-प्रदान हो जाता है किंतु उस एहसास या संतुष्टि का अभाव अवश्य रहता है जो हमें व्यक्तिगत रूप से मिलने पर, आमने-सामने बातचीत करके मिलता है।
शब्दों और वाणी के बगैर
जब हम आमने-सामने मिलते हैं तो कई बार शब्दों या वाणी का इस्तेमाल किए बिना भी बहुत कुछ कह सुन लिया जाता है, समझ लिया जाता है, जान लिया जाता है, जो कि अन्यथा संभव ही नहीं है।
वातावरण
जब हम किसी व्यक्ति से रूबरू मिलते हैं तो न केवल हमारा परिचय उसके व्यक्तित्व से होता है बल्कि उसके आसपास के के प्रभाव से भी हम परिचित हो जाते हैं और यह आपसी समझ बढ़ाने और रिश्तों की गहराई के लिए आवश्यक होता है।
भाव भंगिमा
आमने-सामने मिलने पर हमें सामने वाले की भाव भंगिमा भी दिख जाती है और उससे भी बहुत कुछ अनकही बातें समझ में आ जाती हैं।
बातें करिए, मिलते रहिए
अधिकतर यह सोचकर कि सामने वाला व्यस्त होगा या मेरे फोन करने से वह डिस्टर्ब होगा, हम ना तो फोन करते हैं और न ही मिलने का कोई प्रयास। हमें बातचीत करने में, मिलने जुलने में हमेशा पहल करनी चाहिए। इसमें अहम या संकोच कभी आड़े नहीं आना चाहिए।
अनुभूति
अनुभूति की जो गहराई हमें रूबरू मिलने से होती है वह अन्यत्र संभव ही नहीं है।
आईए व्यक्तिगत मुलाकात के क्रम को बढ़ाते हैं और मीठे सुखद एहसास की अनुभूतियों से सराबोर होते हैं।
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श्री संजय अग्रवाल आयकर विभाग, नागपुर में संयुक्त आयकर आयुक्त हैं. वे हमेशा लोगों से सम्पर्क और संवाद करने के लिये इच्छुक रहते हैं। इसीलिए वे संपर्क, संवाद और सृजन में सबसे अधिक विश्वास करते हैं। मानवीय मूल्यों और सम्बंधों के सूक्ष्म विश्लेषण के चितेरे श्री अग्रवाल "आज का चिंतन" नियमित रूप से लिख रहे हैं।

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