आज का चिंतन ...................... व्हाट्सएप अखाड़ा ................................ संजय अग्रवाल
आज का चिंतन
व्हाट्सएप अखाड़ा
- संजय अग्रवाल
देखने में आता है कि
कई बार व्हाट्सएप ग्रुप में
सदस्यों में विचारों की
अभिव्यक्ति से बात शुरू होकर
प्रश्न उत्तर और फिर बहस और
फिर अप्रियता और संबंधों में
खराबी में बदल जाती है।
सोशल मीडिया
मीडिया का कार्य
समाचारों, सूचनाओं, विचारों
इत्यादि को दूसरों तक
पहुंचाना होता है और
अधिकतर यह
एक तरफा ही होता है।
टीवी और यूट्यूब पर
जो चर्चा, बहस दिखाई जाती है,
वो अधिकतर रिकॉर्डेड ही होती है,
कभी कभार लाइव प्रसारण होता है।
व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम इत्यादि भी
एक तरफा ही होते हैं।
व्हाट्सएप
व्हाट्सएप ग्रुप पर कभी
कुछ सदस्यों के बीच
बातें शुरू होती हैं,
कभी-कभी अर्थ के अनर्थ होते हैं
और फिर समूह में
अनावश्यक रूप से व्यर्थ की चर्चा,
विवाद चल पड़ते हैं
जो कि ठीक नहीं होता है।
ग्रुप का उद्देश्य पूरा नहीं होता है और
इसके चलते लोग
व्हाट्सएप ग्रुप छोड़ने लगते हैं।
अभिव्यक्ति
हर किसी की अभिव्यक्ति की
स्वतंत्रता एक निजी अधिकार होता है,
लेकिन उसके कारण वह
अपने विचारों को दूसरे पर
आरोपित नहीं कर सकता है।
व्यावहारिक रूप से
दूसरे की अभिव्यक्ति की
स्वतंत्रता का सम्मान करना
हमारा कर्तव्य होता है
यद्यपि हम उससे सहमत न भी हों।
क्या करें
व्हाट्सएप ग्रुप में
वाद विवाद से बचें,
दूसरे की बातों का यथोचित
सम्मान करते हुए
अपनी ओर से केवल
अपने विचार रखें,
मत भिन्नता की स्थिति में
दूसरे सदस्य से
व्यक्तिगत चर्चा करें,
ग्रुप पर तर्क वितर्क नहीं करें।
ग्रुप को विवाद का
अखाड़ा कतई ना बनाएं,
यही अभीष्ट होता है।
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श्री संजय अग्रवाल आयकर विभाग, नागपुर में संयुक्त आयकर आयुक्त हैं. वे हमेशा लोगों से सम्पर्क और संवाद करने के लिये इच्छुक रहते हैं। इसीलिए वे संपर्क, संवाद और सृजन में सबसे अधिक विश्वास करते हैं। मानवीय मूल्यों और सम्बंधों के सूक्ष्म विश्लेषण के चितेरे श्री अग्रवाल "आज का चिंतन" नियमित रूप से लिख रहे हैं।

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