क्या पंचायतों में बिना कमीशन नहीं होता कोई काम?
क्या पंचायतों में बिना कमीशन नहीं होता कोई काम?
सतना के निलंबित उपयंत्री के वायरल वीडियो ने खड़े किए सवाल"
भोपाल। इन दिनों सतना जिले के निलंबित उपयंत्री सतीश समेले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में समेले दावा करते दिखाई दे रहे हैं कि ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत और जिला पंचायत स्तर पर बिना रिश्वत और कमीशन दिए कोई भी निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ता। उनके इन आरोपों ने पंचायत व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। हालांकि इन आरोपों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और प्रशासन की ओर से विस्तृत जांच की घोषणा का इंतजार है।
वायरल वीडियो में समेले का दावा है कि पंचायतों में विकास कार्यों की स्वीकृति से लेकर भुगतान तक हर स्तर पर कथित रूप से कमीशन का एक तंत्र काम करता है और बिना पैसे दिए फाइलें आगे नहीं बढ़तीं। यदि यह दावा सही है तो यह केवल सतना ही नहीं बल्कि प्रदेश के पूरे पंचायती राज तंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है। हालांकि अभी तक इन आरोपों के समर्थन में कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है।
समेले के आरोप ऐसे समय सामने आए हैं जब उन्हें सरकारी सेवा के आचरण संबंधी मामलों में निलंबित किया गया है। प्रशासन का कहना है कि उन्हें बंदूक लेकर सरकारी कार्यस्थल पर जाने, अनुशासनहीनता और अन्य शिकायतों के आधार पर कार्रवाई का सामना करना पड़ा। दूसरी ओर समेले का आरोप है कि कार्रवाई इसलिए हुई क्योंकि उन्होंने विभाग की कथित अनियमितताओं पर आवाज उठाई। इन दोनों दावों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
यदि किसी सरकारी कर्मचारी ने इतने गंभीर आरोप लगाए हैं तो सरकार को केवल आरोप लगाने वाले व्यक्ति पर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि आरोपों की भी स्वतंत्र जांच करानी चाहिए। यदि आरोप झूठे हैं तो उन्हें खारिज किया जाए, और यदि उनमें तथ्य हैं तो दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
फिलहाल यह मामला केवल एक वायरल वीडियो या एक निलंबित उपयंत्री के आरोपों तक सीमित नहीं है। यह पंचायत व्यवस्था की विश्वसनीयता और सार्वजनिक धन के उपयोग से जुड़ा प्रश्न बन चुका है। वीडियो में लगाए गए आरोप सच हैं या झूठ। इसका उत्तर केवल निष्पक्ष, समयबद्ध और पारदर्शी जांच से ही मिल सकता है।

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