महू में मौत की फैक्ट्रीका पर्दाफाश

52 किलो एमडी, 260 किलो रसायन और हाईटेक लैब बरामद

       इंदौर। मध्य प्रदेश में नशीले पदार्थों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई में एक ऐसी गुप्त फैक्ट्री का खुलासा हुआ है, जहां हाईटेक मशीनों की मदद से बड़े पैमाने पर मेथाम्फेटामाइन (एमडी) तैयार की जा रही थी। तीन दिनों तक चले इस सनसनीखेज अभियान में करीब 52 किलोग्राम एमडी, 260 किलोग्राम से अधिक रसायन और अत्याधुनिक उपकरण जब्त किए गए। कार्रवाई के दौरान तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

        यह पूरी कार्रवाई केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) द्वारा की गई, जिसने इंदौर जिले की महू तहसील के थवलय गांव में संचालित एक गुप्त प्रयोगशाला का भंडाफोड़ किया। जब्त की गई 43.820 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाली मेथाम्फेटामाइन के साथ कुल बरामदगी 51.992 किलोग्राम तक पहुंच गई। सभी प्रतिबंधित पदार्थों और रसायनों को एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के तहत जब्त किया गया।

बस से शुरू हुआ सुराग, फैक्ट्री तक पहुंची टीम

     खुफिया सूचना के आधार पर 13 फरवरी की रात मंदसौर में एक बस से यात्रा कर रहे दो संदिग्धों को पकड़ा गया। तलाशी में उनके पास से 8.172 किलोग्राम उच्च शुद्धता वाली क्रिस्टल एमडी बरामद हुई। पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह माल एक गुप्त निर्माण प्रयोगशाला से लाया जा रहा था। इसके बाद विभिन्न जिलों की संयुक्त टीमों ने समन्वित अभियान चलाया। आधी रात से शुरू हुई तलाशी अगली सुबह महू के पास स्थित संदिग्ध परिसर तक पहुंची। परिसर के बाहर लोहे का गेट और ताड़ के पेड़ों के बीच छिपी यह फैक्ट्री बाहर से सामान्य दिखती थी, लेकिन अंदर घातक रासायनिक धुएं और तीखी गंध ने टीम को चौंका दिया।

हाईटेक मशीनें, रासायनिक ड्रम और ड्रग प्लांट

प्रयोगशाला के भीतर आधुनिक संयंत्र, रिएक्टर, केमिकल ड्रम और प्रोसेसिंग उपकरण मिले। भारी तकनीकी संरचना को नष्ट करने के लिए विशेषज्ञों की मदद ली गई। नीमच स्थित सरकारी अफीम एवं एल्कलॉइड कारखाने की तकनीकी टीम को बुलाया गया, जिसने मशीनरी को निष्क्रिय कर दिया। मंदसौर में पकड़े गए दोनों आरोपियों और जिस घर में यह लैब चल रही थी, उसके मालिक के खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।

नेटवर्क की तलाश जारी

    प्रारंभिक जांच से संकेत मिले हैं कि यह केवल एक स्थानीय ऑपरेशन नहीं, बल्कि सिंथेटिक ड्रग्स के बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। वितरण चैनल और वित्तीय स्रोतों की पहचान के लिए जांच तेज कर दी गई है। इस बड़े ऑपरेशन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सीमित समय और कम सूचना के बावजूद समन्वित कार्रवाई से अवैध मादक पदार्थों के नेटवर्क को ध्वस्त किया जा सकता है। राज्य में अब तक की सबसे बड़ी सिंथेटिक ड्रग लैब पर हुई यह कार्रवाई नशे के खिलाफ लड़ाई में एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।